Thought 11 To 20

Thought :- 11

जिस तरह चप्पल पहननेवाले को रस्ते
 के पथ्थर और कांटे दुःख नहीं पहुँचाते,

उसी तरह जिसके पास संतोषरूपी धन
 है उसके लिए सभी दिशाए सुखद है

Thought :- 12

सत्य के बिना कोई व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता,
प्रेम के बिना कोई परिवार सुखी नहीं हो सकता,
न्याय के बिना कोई समाज सुखी नहीं हो सकता,
पुण्य के बिना कोई सृष्टि सुखी नहीं हो सकती,

सत्य, प्रेम, न्याय, पुण्य ही चार आयामी शाश्वत एवं सनातन सत्धर्म है,

यदि सुखी रहना है तो सत् धर्मी बनो

Thought :- 13

निराशावादी व्यक्ति को हर अवसर में कठिनाइयां ही नजर आती हैं ,
जबकि एक आशावादी व्यक्ति हर कठिनाई में भी अवसरों की तलाश कर लेता है

Thought :- 14

रोज स्टेटस बदलने से जिंन्दगी नहीं बदलती,
जिंदगी को बदलने के लिये एक स्टेटस काफी है।

Thought :- 15

तुम कब सही थे इसे कोई याद नहीं रखता,
तुम कब ग़लत थे इसे कोई नही भुलता।

Thought - 16

दुश्मन बनाने के लिऐ जरूरी नहीं के युध्ध ही लड़ा जाए,
थोड़े से कामयाब हो जाओ वो खैरात में मिलेंगे।

Thought :- 17

कमोॅ से ही पहचान होती है इंसानों की दुनिया में,
अच्छे कपड़े तो बेजान पुतलो को भी पहनाये जाते है दुकानों में

Thought :- 18

बड़ा लक्ष्य बड़े त्याग के बिना नहीं मिलता,
कई प्रहार सहने के बाद पत्थर के भीतर छिपा हुआ ईश्वर का रूप प्रगट होता है,

अगर चोटी तक पहुँचना है तो रास्ते के कंकड़ पत्थरों से होने वाले कष्ट को भूलना ही होगा।

Thought :- 19

सोने में जब जड़ कर हीरा आभूषण बन जाता है,
वह आभूषण फिर सोने का नही हीरे का कहलाता है,
काया इंसान की सोना है और कर्म हीरा कहलाता है,
कर्मो के निखार से ही मूल्य सोने का बढ़ जाता है।


Thought :- 20

किसी ने बुद्ध से पुछा.
"ज़हर क्या है"..?
बुद्ध ने बहुत सुन्दर जबाब दिया
"हर वो चीज़ जो जिन्दगी में
आवश्यकता से अधिक होती है
वही ज़हर है!!

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