25 मार्च से 2 अप्रैल तक चैत्र माह नवरात्री आप इन दिनों मां दुर्गा के मंत्र का जाप कर सकते हैं।


25 मार्च, बुधवार से चैत्र माह के नवरात्र शुरू हो रहे हैं। दुर्गा पूजा के इस पर्व में, कोई तिथि क्षय नहीं होता है। यह पर्व गुरुवार 2 अप्रैल तक चलेगा। नवरात्रि में देवी की पूजा से भी बड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। इन दिनों दुर्गा सप्तशती और देवी के अन्य मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व है। इस मंत्र का जल्द ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस मंत्र के जप में कोई गलती नहीं होनी चाहिए। मंत्रों का सही उच्चारण करना चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। अधार्मिक कार्यो करने से बचना चाहिए।


मंत्रों जाप की सरल विधि :

नवरात्रि में सुबह जल्दी उठें। घर के मंदिर में गणेशजी और माँ दुर्गा की पूजा करें। पूजा में देवी मां को स्नान कराएं, उनके वस्त्र अर्पित करें। फूल अर्पित करे। धूप-दिप जलाकर आरती करें। फिर आसन पर बैठकर मंत्र का जाप करें। मंत्र जप के लिए आप लाल चंदन मोती, रुद्राक्ष या क्रिस्टल मालाओं का उपयोग कर सकते हैं। पाठ किए जाने वाले मंत्रों की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए।

मंत्र 1 : ऊं ह्रीं दुं दुर्गायै नम:

इस मंत्र का जाप करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है।

मंत्र 2 : सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके, शरंयेत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।

इस मंत्र को करने से देवी माँ अपने भक्तों का कल्याण करती हैं।

मंत्र 3 : ऊँ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

इस मंत्र के जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी दूर हो सकती है।

मंत्र 4 : ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।

चामुंडा माता की कृपा प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का पाठ किया जाता है।


इस बात का रखे ध्यान :

बस इस मंत्र का उच्चारण उचित उच्चारण के साथ करें। यदि मंत्र जाप करने में कोई गलती हो जाए तो उसका फल नहीं मिलता है। जो लोग मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते, वे उपयुक्त ब्राह्मण की मदद लें। अधार्मिक कृत्यों से बचे। मंत्र का उच्चार करने वाले व्यक्ति को धर्म के अनुसार रूप से कार्य करना चाहिए।

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